डीजीपी के आदेश पर एसपी मद्दनिषेध ने सभी पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखा है। एसपी ने उत्पाद विभाग में कार्यरत इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर एवं पुलिस कर्मियों द्वारा अवैध शराब से अर्जित चल अचल संपत्ति जांचने का आदेश जारी किया है। पत्र सामने आने के बाद बवाल मच गया है। मद्य निषेध के एसपी ने न सिर्फ उत्पाद विभाग के पुलिसकर्मियों पर अवैध शराब के कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाया है बल्कि जनप्रतिनिधियों की भी पोल खोली है। पत्र में कहा गया है कि बिहार में शराबबंदी के बाद भी सभी थाना क्षेत्र में चोरी-छिपे उत्पाद विभाग में कार्यरत निरीक्षक, अवर निरीक्षक एवं पुलिसकर्मियों को चढ़ावा देकर लोग शराब खरीद बिक्री का धंधा कर रहे हैं। इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। इस वजह से शराब खरीद-बिक्री पर कानून का खुलेआम मजाक उड़ा रहा है।
एसपी मद्यनिषेध का हुआ ट्रांसफर
पुलिस अधीक्षक मद्यनिषेध ने पत्र में कहा है कि डीजीपी कार्यालय से 11 दिसंबर 2020 को मद्यनिषेध कार्यालय में पत्र आया था। इसके बाद यह आदेश जारी किया जा रहा है। मद्यनिषेध एसपी के कार्यालय से यह पत्र 6 जनवरी 2021 को जारी किया गया है। हालांकि जिस समय यह पत्र जारी हुआ उस समय एसपी छुट्टी में थे।जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक के छुट्टी में होने की वजह से प्रभारी एसपी ने यह आदेश जारी किया। अब तो मद्य निषेध के एसपी राकेश कुमार सिन्हा को मंगलवार को स्थानांतरित कर स्पेशळ ब्रांच का एसपी बना दिया गया है। उनके स्थानांतरण के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि कहीं इस आदेश का साइड इफेक्ट तो नहीं ?