शुक्रवार, 20 मार्च 2020

डीएम ने मेडिकल स्टोरों पर मारा छापा

संबंधित अधिकारियों ने प्रतिष्ठानों एवं मेडिकल स्टारों पर मारा छापा


नैनीताल। कोरोना वायरस को लेकर लोगों में व्याप्त भय का फायदा उठाकर मास्क एवं सेनीटाइजर की कालाबाजारी की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। प्रशासन को विभिन्न माध्यमों से जानकारी मिल रही है कि कुछ कारोबारी मास्क एवं सेनीटाइजर की कालाबाजारी कर रहे हैं और एमआरपी से ज्यादा दामों पर बिक्री कर रहे हैं।


जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के क्रम में सरोवर नगरी में अधिकारियों ने औचक छापेमारी कर 21 प्रतिष्ठानों एवं मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कार्रवाही की। छापेमारी कार्रवाही में जिला पूर्ति अधिकारी मनोज कुमार बर्मन, औषधि निरीक्षक मीनाक्षी बिष्ट, तहसीलदार भगवान सिंह चौहान, पूर्ति निरीक्षक राहुल डांगी शामिल रहे। 


अधिकारियों ने इंदिरा फार्मेसी, कैलाश आयुर्वेदिक, गंगाोला कैमिस्ट, राजू किराना स्टोर, गुरूवचन सिंह एण्ड ब्रदर्स होल सेलर, गुप्ता गिफ्ट इम्पोरियम, फॉर सीजनस् शॉप, पॉपुलर फार्मेसी, मधुर मिलन गिफ्ट सेंटर, कृष्णा स्टोर, हिमानी मेडिकोज, गुलाटी गिफ्ट हाउस, एसके साह एण्ड ब्रदर्स, दीप कन्फेक्शनरी, संजीवनी मेडिकल स्टोर, जनता मेडिकल स्टोर, प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र बीडी पाण्डे रोड, मोहन को केमिस्ट, दि केमिस्ट, मेडिकल कॉर्नर तथा राम सिंह संत सिंह मेडिकल स्टोर में सेनीटाइजर एवं मास्क स्टॉक की गहनता से चैकिंग की। इंदिरा फार्मेसी पर केवल 8 डिस्पोजेबल फैस मास्क पाये गए, अधिकॉश प्रतिष्ठानों पर स्टॉक निल पाया गया। राजू किराना स्टोर पर सेनीटाइजर के 15 पीस मिले। अधिकारियों ने प्रतिष्ठान स्वामियों को सचेत किया कि मास्क व स्टॉक का विधिवत अंकन करें तथा बिक्री के साथ कैश मेमों भी उपलब्ध कराया जाए तथा बिक्री का रिकोर्ड भी रखा जाये।  जिलाधिकारी श्री बंसल ने कहा है कि संक्रमण के दौरान कोई भी कारोबारी सेनीटाइजर एवं मास्क की कालाबाजारी न करे। जिले में चैकिंग अभियान निरन्तर जारी रहेगा। संक्रमण से संबंधित सेनीटाइजर एवं मास्क की कालाबाजारी करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत कार्रवाही अमल में लाई जाएगी।


खौफः रेलवे ने 750 ट्रेन की रद्द

नई दिल्ली। भारतीय रेल ने कोरोना के कहर की वजह से कई स्पेशल ट्रेन और कई पैसेंजर ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है। रेलवे ने आज 750 से ज्यादा ट्रेनें कैंसिल की हैं। जिसमें शताब्दी, जनशताब्दी सुपरफास्ट, एक्सप्रेस, पैसेंजर गाड़ियों के साथ कुछ स्पेशल ट्रेनों को भी रद्द किया गया है।


रेलवे की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 20 मार्च को जो ट्रेनें कैंसिल की गई हैं। उसमें महाराष्ट्र, बिहार, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरू, पुणे समेत कई राज्यों को जाने वाली प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। भारतीय रेलवे की ओर से प्रतिदिन कैंसिल ट्रेनों की लिस्ट जारी की जाती है। जिसमें विभिन्न कारणों से रद्द की गई गाड़ियों की जानकारी मिलती है। रेलवे ने 31 मार्च तक सैकड़ों ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है, वहीं रेल मंत्रालय ने कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए ट्रेन टिकटों पर मिलने वाली सभी छूट को खत्म करने का फैसला किया है। रेलवे ने जिन रेलगाड़ियों को कैंसिल किया गया है। उनकी सूची रेलवे की वेबसाइट नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम पर डाल दी है। वहीं स्टेशनों पर एनाउंसमेंट के जरिए यात्रियों को कैंसिल ट्रेनों की सूचना दी जा रही है। 139 सेवा पर एसएमएस कर के भी गाड़ियों की स्थिति जानी जा सकती है। वहीं जिन यात्रियों की रेलगाड़ी कैंसिल हो गई है, वो अपना टिकट कैंसिल करा कर पूरा रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में आप अपने रूट की दूसरी ट्रेन के विकल्प पर विचार कर सकते हैं।


 


शिल्पकारी के हुनर को नया आयाम

सरकार की नई पहल : पत्थर शिल्पकारों के हुनर को मिलेगा नया आयाम
रुपेश टंडन
रायपुर। हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा राज्य सरकार की मंशानुरूप और ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में पत्थर शिल्पकारों के हुनर को नया आयाम प्रदान किया जा रहा है। ग्रामोद्योग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा बस्तर वनांचल क्षेत्र के बस्तर विकासखंड के अंतर्गत परचनपाल, भोण्ड, लामकेर, भाटपाल आदि ग्रामों में निवासरत पत्थर शिल्प के शिल्पकारों का सामाजिक एवं आर्थिक सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है तथा शिल्पकला में आने वाली विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों को जानने और समझने के लिए भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से सर्वे भी किया जा रहा है।


कार्यालय विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय, नई दिल्ली की स्वीकृति से हस्तशिल्प बोर्ड द्वारा इसके लिए स्वीकृत 5 अनुबंधित कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है, जिनके द्वारा कुल 4 माह में संबंधित क्षेत्र के पत्थर शिल्पकारों का जमीनी स्तर पर और वर्तमान में उनके रहन-सहन एवं सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति के साथ-साथ शिल्पकला तैयार करने में आने वाली कठिनाइयां जैसे कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादित सामग्री का विक्रय और सामग्रियों के लिए बाजार की व्यवस्था आदि में होने वाली परेशानियों के संबंध में सर्वेक्षण किया जा रहा है। बोर्ड द्वारा सर्वेक्षण कार्य पूर्ण होने के उपरांत संबंधित शिल्पकारों की समस्याओं का नियमानुसार निराकरण बोर्ड और राज्य शासन के स्तर पर करने का प्रयास किया जाएगा।


प्रचार हेतु 'यूनिसेफ' की एडवाइजरी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनिसेफ ने साबुन से हाथ धोने के प्रभावी तरीकों के बारे में एडवाइजरी जारी की है। राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) ने इस एडवाइजरी का पालन सुनिश्चित करने और साबुन से हाथ धुलाई को बढ़ावा देने के लिए सभी जिलों के कलेक्टर-सह-अध्यक्ष, प्रबंधन समिति, जिला स्वच्छ भारत मिशन और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-सदस्य सचिव, जिला स्वच्छ भारत मिशन को परिपत्र जारी किया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के संचालक धर्मेश साहू ने हर गांव में सक्रिय स्वच्छाग्राहियों के माध्यम से कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने लोगों को साबुन से हाथ धुलाई के लिए प्रेरित करने के साथ ही मीडिया के जरिए एडवाइजरी का व्यापक प्रचार-प्रसार करने कहा है।


यूनिसेफ द्वारा जारी मार्गदर्शिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण पूरी दुनिया इस समय स्वास्थ्य आपातकाल का सामना कर रहा है। बलगम, खांसी या छींक से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स से वायरस के आंख, नाक या गले के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने से यह श्वास संबंधी वायरस मानव शरीर को संक्रमित करता है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह संक्रमण अधिकांशतः हाथों के द्वारा फैलता है। इस वैश्विक महामारी को रोकने का सबसे आसान, सस्ता और प्रभावी तरीका साबुन व पानी से बार-बार हाथ धोना है।


हाथ कब धोना चाहिए ?


हाथों की अच्छी सफाई के लिए साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए। शौच के और शिशु का मल साफ करने के बाद, भोजन करने, खाना बनाने, परोसने, शिशु को खाना खिलाने और स्तनपान के पहले हाथ धोना चाहिए। पशुओं व पालतू जानवरों को छूने और साफ-सफाई के काम के बाद तथा यदि हाथ गंदे दिखाई दें, तो हाथ जरूर साफ करना चाहिए।  कोरोना वायरस से बचाव के लिए नाक बहने, खांसने, छींकने, सार्वजनिक स्थलों जैसे बाजार व पूजास्थल से लौटने या सार्वजनिक यातायात के साधनों के उपयोग के बाद हाथ धोना चाहिए। घर के बाहर कोई भी वस्तु, रूपया या सतह को छूने के बाद तथा किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल के पहले, देखभाल के दौरान और देखभाल के बाद अच्छे से हाथ जरूर धोना चाहिए।


हाथ कैसे धोएं ?


साबुन और पानी से 20 से 30 सेकंड तक हाथ अच्छे से साफ करना चाहिए। प्रभावी सफाई के लिए पहले हाथों को पानी से गीला करें और फिर पर्याप्त मात्रा में साबुन लगाएं। हथेलियों की भीतरी व ऊपरी दोनों सतहों को रगड़ें। सभी उंगलियों के जोड़ों और नाखूनों को भी रगड़ें। उंगलियों को नमस्ते की अवस्था में रखते हुए कलाईयों को रगड़ें। हाथ को साफ पानी से धोएं। अंत में हाथों को हवा में सुखाएं या साफ सूखे तौलिए से पोंछे। कीटाणु गीली त्वचा में आसानी से फैलते हैं। इसलिए हाथों को पूरी तरह से सुखाना बहुत महत्वपूर्ण है। हाथों को हवा में, टिशु पेपर या साफ कपड़े का उपयोग कर सुखाना चाहिए। 


थाना अध्यक्ष से लिपटकर रोए लोग

थानाध्यक्ष के काम की मुरीद थी जनता, हुआ तबादला तो लिपट कर रो पड़े लोग


नागेश त्रिपाठी फतेहपुर


सम्मान के साथ दी गयी विदाई, एसओ अर्जुन सिंह की कार को लोगों ने खुद धक्का लगाया


फतेहपुर। पुलिस की कार्यशैली से लोगों में नाराजगी रहती है लेकिन कुछ पुलिसकर्मी ऐसे होते हैं, जो अपने काम से लोगों के दिल में जगह बनाने में सफल रहते हैं। ऐसे पुलिस ऑफिसर का जब तबादला होता है तो पता चलता है कि उन्हें लोग कितना पसंद करते हैं। पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा ने कई थानेदार को इधर से उधर किया है उसी में धाता एसओ रहे अर्जुन सिंह का तबादला इंस्पेक्टर एसओजी प्रभारी  प्रथम में हुआ है। बृहस्पतिवार को जब थानेदार अर्जुन सिंह अपना थाना छोड़ कर जाने लगे तो क्षेत्रीय जनता की भारी भीड़ जमा हो गयी। लोग उनसे लिपट कर रोने लगे। जाते समय लोगों ने खुद कार का धक्का लगा कर सम्मान के साथ विदाई दी आपको बता दें अर्जुन सिंह अपने मधुर व्यवहार व लोगों से अच्छे बर्ताव के लिए जाने जाते हैं। धाता थाने में लगभग दो साल तक एसओ रहने के दौरान उन्होंने अपराध में भारी अंकुश लगायासाथ ही पीडि़तों की हर संभव मदद की थी जिसके चलते ही स्थानीय लोगों से लेकर थाने के पुलिसकर्मियों में उन्हें बहुत पसंद करने लगे थे। धाता एसओ बनने के बाद उन्होंने अपराध रोकने की गुड़ वर्क करने की बहुत शौक रहती थी सभी को थाना में आधारभूत सुविधाए दिलायी थी। बहुचर्चित खड़सेडवा हत्याकांड  का 20 दिन के अंदर ही खुलासा करने में सफलता पायी थी जिससे जनता भी बहुत खुश हुए थे। एसओ रहे अर्जुन सिंह उस समय भी चर्चा में आये थे जब एसपी के आदेश पर सदर कोतवाली अंतर गत भारी मात्रा में गांजा आदि पकड़ा था जनपद में हर दम गुड़ वर्क की  सुर्खियों में छाए रहते थे गुरुवार को ट्रांसफर के बाद स्थानीय लोगों ने सम्मान के साथ अर्जुन  को थाने से विदाई दी है। पहले उन्हें माला पहनाया गया था और फिर मिठाई खिलायी गयी। इसके बाद लोग गले मिल कर रो पड़े थे। अंत में जब वह थाने से जाने लगे से लोगों ने सम्मान जताते हुए उनकी कार को धक्का भी दिया।



कानून व्यवस्था और प्रणाली ?

देश को दहला देने वाले निर्भया मामले के सभी चार दोषीयो को सुबह ५.३० पर वे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। भारत में न्याय और निर्णय की यह घड़ी आठ साल बाद बमुश्किल आई है। न्याय में देर के कारण इस घृणित अपराध का विकल्प हैदराबाद का एक ऐसे ही मामले का पुलिस एनकाउंटर भी समाज में दिखा। भारतीय समाज को यह दोनों मामले कुछ सीख देंगे क्या ?
भारत की राजधानी दिल्ली के वसंत विहार इलाके में १६  दिसंबर, २०१२ की रात २३  साल की पैरामेडिकल छात्रा निर्भया के साथ चलती बस में बहुत ही बर्बर तरीके से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। घटना के बाद उसे बचाने की हर संभव कोशिश हुई, पर उसकी मौत हो गयी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बस चालक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया था। जिनमें एक नाबालिग भी था, जिसे तीन साल तक सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया। जबकि एक आरोपी राम सिंह ने जेल में खुदकुशी कर ली।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सितंबर, २०१३ में इस मामले में चार आरोपियों पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनायी| मार्च, २०१४ में हाइकोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा। मई, २०१७ में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी। मई, २०१७  में ही  देश की सर्वोच्च अदालत ने जिस फैसले की पुष्टि कर दी, उसके गुनहगारों को कल तक सजा नहीं मिली, आज वो दिन बमुश्किल आया। वैसे फांसी की तारीख २२ जनवरी तय हुई थी, पर न्यायिक दांव-पेच के कारण यह टल गयी और आज जैसे-तैसे मामला अंतिम अंजाम तक पहुंचा है। कई बार निर्भया की मां अदालत में फूट-फूट कर रोई, उन्होंने कोर्ट से कहा था कि मेरे अधिकारों का क्या? मैं भी इंसान हूं, मुझे सात साल हो गये, मैं हाथ जोड़ कर न्याय की गुहार लगा रही हूं। सब जानते हैं यह वह घटना है, जो महीनों तक देशभर के मीडिया की सुर्खियों में रही। इसे लेकर कई शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। जन आक्रोश को देखते हुए तत्काल जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में एक समिति बनायी गयी थी और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए रेप कानूनों में बदलाव कर कड़ा किया गया था। दुष्कर्म के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किये जाने की व्यवस्था हुई थी।
मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला, सजा भी सुनाई गयी, लेकिन गुनहगारों को सजा नहीं मिल पायी। जेल नियमों के अनुसार एक ही अपराध के चारों दोषियों में से किसी को भी तब तक फांसी नहीं दी जा सकती, जब तक कि वे दया याचिका सहित सभी कानूनी विकल्प नहीं आजमा लेता। लिहाजा, सभी दोषी एक-एक कर अपने विकल्पों का इस्तेमाल कर व्यवस्था की कमजोरी का फायदा उठाते रहे।
 इससे आम आदमी के जहन में पूरी कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गये। यह स्थिति किसी भी भी तरह समाज के लिए अच्छी नहीं है। परिणाम, हैदराबाद के बहुचर्चित रेप कांड में पकड़े गये चारों अभियुक्तों का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया। इस एनकाउंटर के ‘तत्काल न्याय’ से पूरी न्याय प्रणाली पर देशव्यापी बहस छेड़ दी। मुठभेड़ की खबर लगते ही लोग घटनास्थल पर पहुंचे और कुछेक लोग पुलिस पर फूल बरसाते भी नजर आये। दोनों ही प्रणाली समाज के सामने आज प्रश्न चिन्ह हैं ? ऐसी घटनाओं से हमारी पूरी न्याय व्यवस्था पर संकट उत्पन्न होने का खतरा है, लेकिन इस सवाल का जवाब भी देना जरूरी है कि क्या दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध की शिकार बेटी को तुरंत न्याय पाने का अधिकार नहीं है?
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार २०१४ में अदालतों ने दुष्कर्म के २७.४ प्रतिशत मामलों में फैसले सुनाये थे।२०१७ में ऐसे मामलों में फैसला सुनाने में गति में मामूली तेज हुई और ३१.८ प्रतिशत   हो गयी, लेकिन अपराधी सबूत मिटाने की गरज से दुष्कर्म पीड़िता को जला देते हैं। ऐसे मामले बड़े। देश में इस भांति के कुल ५७४  मामलों में से 90 प्रतिशत अब भी अदालतों में लंबित हैं।
बड़ी संख्या में लोगों का हैदराबाद प्रणाली के पक्ष में झुकाव देखने को मिला यह सामाजिक व्यवस्था की विफलता का भी संकेत है। पूरे देश और समाज को यह चिंतन करना होगा कि न्याय प्रणाली को दुरुस्त कैसे किया जाए? खासकर ऐसे मामलों में।


राकेश दुबे


20 राज्यों में संक्रमण, 5 लोगों की मौत

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से देश में पांचवीं मौत हो गई है। राजस्थान में इतालवी नागरिक की मौत हुई है। वह कोरोना से संक्रमित था। शुक्रवार सुबह तक पीड़ितों की संख्या 200 को पार कर गई है। इसमें से 20 ठीक हो चुके हैं। शुक्रवार को लखनऊ में चार नए मरीज मिले। लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में अब 9 मरीजों का इलाज चल रहा है। कोरोना अब 20 राज्यों में पाव पसार चुका है और सबसे ज्यादा महाराष्ट्र प्रभावित है।


अगर राज्यवार कोरोना वायरस के केसों की बात करें तो आंध्र प्रदेश में 3, दिल्ली में 12, हरियाणा में 17, कर्नाटक में 15, केरल में 28, महाराष्ट्र में 49, पंजाब में एक, राजस्थान में 9, तमिलनाडु में 3, तेलंगाना में 16, जम्मू-कश्मीर में 4, लद्दाख में 8, उत्तर प्रदेश में 23, उत्तराखंड में 3, ओडिशा में 2, गुजरात में 2, पश्चिम बंगाल में 2, चंडीगढ़ में एक, पुदुचेरी में एक और छत्तीसगढ़ में एक मरीज सामने आए हैं।


अब तक 5 की मौत


कोरोना की चपेट में आकर अभी तक चार लोग जान गंवा चुके हैं। पहली मौत कर्नाटक के कलबुर्गी में हुई थी। उसके बाद दूसरी मौत दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हुई। तीसरी मौत मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में हुई और चौथी मौत कल यानी गुरुवार को पंजाब में हुई है। खास बात है कि जिन चारों की मौत हुई है, उनकी उम्र 60 साल से अधिक थी। इसके अलावा शुक्रवार यानी आज राजस्थान में एक इतालवी नागरिक की मौत हो गई है। उसका कई दिनों से इलाज चल रहा था।


डीएम की अध्यक्षता में मासिक बैठक आयोजित

डीएम की अध्यक्षता में मासिक बैठक आयोजित  भानु प्रताप उपाध्याय  मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में विकास भवन के सभाकक्ष में ...