केंद्रीय कार्यालय में हुई चुनाव समिति की बैठक
अकांशु उपाध्याय नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक बृहस्पतिवार को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आरंभ हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के लिए उम्मीदवारों के नामों पर विचार विमर्श किया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री व उत्तर प्रदेश के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह सहित केंद्रीय चुनाव समिति के अन्य सदस्य पार्टी मुख्यालय में बैठक में शामिल हुए। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी डिजिटल माध्यम से इस बैठक से जुड़े।
ज्ञात हो कि नड्डा, राजनाथ और गडकरी पिछले दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से पहले, पिछले दो दिनों से भाजपा में बैठकों का दौर जारी है। अब तक हुई बैठकों के दौरान भाजपा की चर्चाओं के केंद्र में उत्तर प्रदेश रहा। पार्टी ने जहां अपने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की वहीं अपने सहयोगियों को साधने की भी कोशिश की। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार को अपना दल (एस) की नेता अनुप्रिया पटेल ने केशव प्रसाद मौर्य और स्वतंत्र देव सिंह के साथ देर रात तक सीटों के तालमेल को लेकर चर्चा की, वहीं निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने अपने सांसद पुत्र प्रवीण निषाद के साथ अमित शाह से चर्चा की।
सूत्रों ने बताया कि अनुप्रिया पटेल 20 सीटों की मांग कर रही हैं लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा चाहती है कि पिछले विधानसभा चुनाव में अपना दल को जितनी सीटें मिली थी, वह उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़े। पिछले विधानसभा चुनाव में अपना दल को गठबंधन के तहत 11 सीटें मिली थीं। पार्टी को नौ सीटों पर जीत मिली थी।
कांग्रेस द्वारा उत्साह नहीं दिखाने पर चिंता जताई
कविता गर्ग मुबंई। महाराष्ट्र के गठबंधन प्रयोग को गोवा विधानसभा चुनाव में दोहराने के अपने प्रस्ताव पर कांग्रेस द्वारा उत्साह नहीं दिखाए जाने पर शिवसेना ने चिंता जताई है। शिवसेना के नेता संजय राउत ने बृहस्पतिवार को कहा कि गोवा की राजनीतिक स्थिति ऐसी है कि कांग्रेस यदि अपने बलबूते पर वहां विधानसभा चुनाव लड़ती है तो वह इकाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। राउत ने मीडिया से कहा, गोवा में कांग्रेस के केवल तीन विधायक हैं। पार्टी के विधायकों ने सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ दी।
अहम राजनीतिक दलों के तौर पर हमने (शिवसेना एवं राकांपा) ने कांग्रेस को उसकी इस मुश्किल घड़ी में सहयोग की पेशकश की थी। लेकिन मैं नहीं जानता कि कांग्रेस क्या सोच रही है। यदि वह अपने बलबूते चुनाव लड़ती है तो वह इकाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकती। कांग्रेस के गोवा प्रभारी दिनेश गुंडूराव, कांग्रेस विधायक दल के नेता दिगंबर कामत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चूडांकर के साथ एक दौर की बातचीत कर चुके राउत ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि कांग्रेस 40 में से 30 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़े और बाकी सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ दे।
उन्होंने कहा कि गोवा में जिन 10 सीट पर कांग्रेस पिछले 50 साल के दौरान नहीं जीत पाई है, वे सीट शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी को दे दी जाएं। राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी गठबंधन के विचार के पक्ष में थे लेकिन स्थानीय नेतृत्व की भिन्न राय थी। राउत ने कहा कि यदि गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल इस विधानसभा चुनाव में राजनीतिक मैदान में उतरने का फैसला करते हैं तो शिवसेना उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि, उत्पल को चुनाव लड़ने का साहसिक निर्णय लेना चाहिए। आपको चुनाव लड़ने के लिए साहसी होने की जरूरत है। यदि वह निर्णय लेते हैं तो शिवसेना उनका साथ देगी। राउत ने कहा कि पिछले साल मुंबई के एक होटल में दादरा एवं नगर हवेली के लोकसभा सदस्य मोहन डेलकर के मृत मिलने के बाद शिवसेना ने उनके परिवार का साथ दिया था और डेलकर की पत्नी कलाबेन डेलकर ने शिवसेना प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा उपचुनाव जीता था। उत्पल ने पणजी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी जिसका प्रतिनिधित्व चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे उनके पिता मनोहर पर्रिकर ने किया था। वह इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले थे। गोवा में 14 फरवरी को विधानसभा चुनाव होगा।
'देश का मेंटॉर’ कार्यक्रम निलंबित करें: एनसीपीसीआर
अकांशु उपाध्याय नई दिल्ली। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वह अपने ‘देश का मेंटॉर’ कार्यक्रम तब तक निलंबित कर दे। जब तक इसकी खामियों को दूर न कर लिया जाए। एनसीपीसीआर का कहना है कि इस कार्यक्रम से बच्चों को कुछ खतरों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव को पत्र लिखा था और इस सप्ताह की शुरुआत में उसने फिर से पत्र लिखकर कहा था कि जो जवाब उसे मिला है। उसमें उपयुक्त तथ्य मौजूद नहीं हैं। आयोग ने गत सोमवार को मुख्य सचिव विजय कुमार देव को पत्र लिखा था, जिसमें उसने कहा कि, जवाब में यह बताया गया है कि इस कार्यक्रम में संरक्षक (मेंटॉर) समान लिंग वाले होते हैं। ऐसे में यह बताना जरूरी है कि उत्पीड़न या यौन हमला लिंग के आधार पर नहीं होता है और यह जरूरी नहीं है कि समान लिंग के लोग ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
उसने कहा कि खामियों को दूर किए जाने तक इस कार्यक्रम को निलंबित रखा जाए। ‘देश का मेंटर’ कार्यक्रम पिछले साल अक्टूबर महीने में शुरू किया गया था। इसके तहत नौवीं से 12वीं कक्षा के बच्चों को समर्पित ‘मेंटॉर’, उनके करियर एवं जीवन के संदर्भ में मार्गर्दशन देंगे। इस कार्यक्रम के ब्रांड एम्बेस्डर बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद हैं।
मनोज सिंह ठाकुर इंदौर। देश में कोविड-19 का प्रसार रोकने में रात के कर्फ्यू की उपयोगिता को लेकर सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत पूछे गए सवालों के जवाब देने से केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रावधानों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया है। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बृहस्पतिवार को बताया, महामारी का प्रसार रोकने में रात के कर्फ्यू की उपयोगिता को लेकर मेरी आरटीआई अर्जी के जवाब में गृह मंत्रालय का मत है कि इसमें पूछे गए सवाल स्पष्टीकरण मांगे जाने की श्रेणी में आते हैं और आरटीआई कानून के प्रावधानों के तहत आवेदक को किसी विषय पर सरकार की ओर से स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता।
गौड़ ने आरटीआई कानून के तहत गृह मंत्रालय से पूछा था कि रात का कर्फ्यू कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में किस तरह मददगार साबित होता है और इस सिलसिले में सरकार के पास क्या कोई वैज्ञानिक आधार है? आरटीआई कार्यकर्ता ने गृह मंत्रालय से यह भी जानना चाहा था कि महामारी से निपटने के लिए रात का कर्फ्यू लगाने का विचार आखिर किसका था और यह विचार कहां से लिया गया था? इन सवालों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गौड़ की अर्जी का निपटारा करते हुए जवाब दिया, चाही गई सूचना स्पष्टीकरण या व्याख्या के अनुरोध की प्रकृति की है।
सनद रहे कि किसी विषय पर स्पष्टीकरण दिए जाने या व्याख्या किए जाने या तर्क-वितर्क किए जाने को आरटीआई कानून की धारा दो (एफ) के तहत सूचना की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। गौरतलब है कि कोविड-19 की तीसरी लहर के जोर पकड़ने के बीच महामारी की रोकथाम के उपाय के तहत मध्यप्रदेश और कई अन्य राज्यों की सरकारों ने रात का कर्फ्यू बहाल कर दिया है।
दुष्यंत टीकम रायपुर। रायपुर डीईओ अशोक नारायण बंजारा को स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। बंजारा को स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम के निवास कार्यालय में फ़ाइल के नस्ती परीक्षण और मंत्री के पास पुटअप करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से इस बाबत निर्देश जारी कर दिया गया है। अवर सचिव जनक कुमार ने इस बाबत निर्देश जारी किया है। अभी रायपुर डीईओ के साथ साथ एएन बंजारा डीपीआई में सहायक संचालक की भी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें मौजूदा जिम्मेदारी के साथ साथ स्कूल शिक्षा मंत्री के निवास कार्यालय की भी जिम्मेदारी दी गई है।
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